بسم الله الرحمن الرحيم
वुज़ू और जदीद साइंस
किस्त नम्बर 31
सर का मसह करते
بسم الله اللهم اظلنى تحت ظل عرشك يوم لا ظل الا ظل عرشك
तरजुमा ::::: ऐ अल्लाह उस दिन जबकि सिवाय तेरे अर्श के और कहीं साया ना होगा मेरे सर पर अपने अर्श का साया फरमाना
ज़ेहनी तरबियत=== सर पर मसह ( हाथ फेरते वक़्त ) गोया इस इशारे व हरकत के दौरान उस हशर के मंजर को याद दिलाया गया जहां अर्शे इलाही के साए के सिवा कोई साया ना होगा जबकिे अल्लाह अज़ज़ा वजल के नाफरमान सवा नेज़े आफताब की तमाज़त से सख़्त परेशान रहेंगे। उस वक़्त की होलनाकी को ज़ेहन में जगह दें ताकि हमें भी अर्शे इलाही के साए में रहने की तमन्ना से सरफराज़ी बख़्शी जाए
कान के मसह के वक़्त
اللهم اجعلنى من الذين يستمعون القول و يتبعون احسنة
तरजुमा ==== ऐ अल्लाह मुझे उन लोगों में से कर दे जो हक़ बात को कान लगाकर सुनते हैं और अच्छी बात पर अमल करते हैं
गर्दन का मसह करते वक़्त
بسم الله اللهم اعتق رقبتى من النار
तरजुमा ==== ऐ अल्लाह मेरी गर्दन को आग से बचा ले
ज़ेहनी तरबियत ==== इस मसह की हरकत पर ज़ेहनी तरबीयत यह है ऐ अल्लाह मेरी इस गर्दन को दोज़ख़ की आग से बचा जबकि तेरे नाफरमानों की गर्दन को आग की ज़ंजीरों से घसीटा जाएगा मसह की इस तरतीब में न सिर्फ सर और गर्दन के गिर्दे ग़ुब्बार और जरासीम को गीले हाथ बेअसर कर देते हैं बल्कि गर्दन और हराम मुग़्ज़ spinal cord उसकी रतूबत और गर्दन की सर्द लहरों से मुतअस्सिर करके उनकी तक़वियत और सकून का सबब होता है
सीधा पाऊँ धोते वक़्त
اللهم ثبت قدمى على الصراط يوم تنزيل الاقدام المنافقين
तरजुमा ==== ऐ अल्लाह मेरे क़दम पुल सिरात पर उस वक़्त क़ायम रख जबकिे मुनाफिक़ीन के क़दम कट रहे होंगे
ज़ेहनी तरबियत =_=_= रोज़े हिसाब जब पुल सिरात पर से हर एक को गुज़रना होगा और जिसके नीचे दोज़ख़ देहकती होगी या अल्लाह अज़ज़ा वजल मेरे इन क़दमों से इस दुनिया में ऐसे काम ले जिसकी बदौलत में उस पुल सिरात पर से वा आसानी गुज़र सकूँ वरना मुनाफिक़ों को तो दोज़ख़ में कट कट कर गिरना होगा और उनके क़दम डग मगाऐंगे गोया पेशगी तैयारी करनी है कि हमें सिराते मुस्तक़ीम पर चलने के वक्त़ आसानिया अता फरमा
बायाँ पाऊँ धोते वक़्त
اللهم اغفرنى ذنبا مغفورا وسعيا مشكورا وتجارة لن تبورا
तरजुमा ====ऐ अल्लाह अज़ज़ा वजल मेरे गुनाह माफ कर मेरी कोशिश कामयाब फरमा और मेरी तिजारत ( कारोबार ) भी तबाह ना हों
ज़ेहनी तरबियत """"" इंसान अपने पाऊँ के ज़रिए चलता फिरता है नेकी या गुनाहों के कामों में अक्सर क़दम ही इस्तेमाल होते रहते हैं इसलिए दुआ सिखाई गई है कि इन क़दमों को गुनाहों के कामों से बचाकर कामयाबी और नेकी की राह पर गामज़न फरमा दीजिए और दुनयावी कारोबार या तिजारत जिसके ज़रिए में कमा रहा हूं ऐसा नफा इनायत फरमाइए जिसको ज़वाल ना हो और मेरे क़दमों की मेहनत को मेरी तबाही का बाइस ना बनाना
इबादत और जदीद साइंस
सफा नम्बर 57
तालिब ए दुआ
मुहम्मद ज़ुलफ़िक़ार ख़ान
नईमी रज़वी क़ादरी मुरादाबादी
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Subhanallah
ReplyDeleteShukriya
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