Skip to main content

Wali Ki Tasbeeh वली की तस्बीह ।


🌴🌹वली_की_तस्बीह🌹🌴

पीर मेहर अली शाह رحمتہ اللہ علیہ गोलड़ा के प्लेटफार्म पर बैठे हुए थे वहीं प्लेटफार्म पर एक अंग्रेज़ अफसर भी अपनी ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था उसने दूर से देखा कि एक फक़ीर बैठा है फटी हुई गुदड़ी बगल में मुसल्ला हाथ में तस्बीह है उसे जुस्तजू हुई और कुछ टाइम पास की नियत से हज़रत मेहर अली शाह की तरफ बढ़ा और पास जाकर उनकी तस्बीह की तरफ इशारा करके बोला: बाबा ये क्या है?

              पीर मेहर अली शाह رحمتہ اللہ علیہ ने नज़र उठा कर देखा एक अंग्रेज़ अफसर कांधे पर बंदूक लिए खड़ा है पीर मेहर अली शाह ने उस अंग्रेज़ की बंदूक की तरफ इशारा करके पूछा: ये क्या है? 
उस अंग्रेज़ ने कहा : ये मेरा हथियार है !
पीर मेहर अली शाह ने कहा: ये मेरा हथियार है !

वो अंग्रेज़ खामोश हो गया फिर थोड़ी देर के बाद सवाल करता है बाबा ये तुम्हे किसने दिया?
पीर मेहर अली शाह ने फ़रमाया : ये तुझे किसने दिया?
वो अंग्रेज़ बोला: ये मुझे मेरे सीनियर ऑफिसर ने दिया है मेरे बॉस ने दिया है !
पीर मेहर अली शाह ने फ़रमाया: ये मुझे मेरे बॉस ने दिया है मेरे ग़ौसे आज़म ने अता किया है !

वो अंग्रेज़ फिर खामोश हो गया कुछ देर बाद फिर सवाल करता है: बाबा ये किस काम आती है?
पीर मेहर अली शाह ने उसकी बंदूक की तरफ इशारा करके फ़रमाया: ये किस काम आती है?
वो अंग्रेज़ अफसर बोला इसका कमाल देखना चाहते हो आपने फरमाया : दिखा ! वो बोला:वो सामने पेड़ नज़र आ रहा है 
आपने कहा: हां,
कहा उस पर बैठी चिड़िया नज़र आ रही है !
फ़रमाया: नज़र आ रही है
बोला: अब देखो मेरे हथियार का कमाल ये कहकर निशाना लगाया और ट्रिगर दबा दिया चिड़िया एक लम्हे में पेड़ से ज़मीन पर आ गिरी और तड़प कर मर गई वो अंग्रेज़ सीना तान कर बोला: देखा मेरे हथियार का कमाल !

पीर मेहर अली शाह رحمتہ اللہ علیہ मुस्कुरा कर खड़े हुए उस चिड़िया के क़रीब पहुंचे और अपनी तस्बीह उस चिड़िया के बदन से मस (टच) कर दी चिड़िया फड़फड़ाई और ज़िंदा होकर वापस पेड़ पर जाकर बैठ गई !
पीर मेहर अली शाह ने फ़रमाया: देखा मेरे हथियार का कमाल ! तेरा हथियार मख्लूक़ को मौत देता है, और मेरा हथियार मख्लूक़ को ज़िन्दगी और राहे हिदायत अता फरमाता है ! अब बता किसका हथियार बेहतर है !

वो अंग्रेज़ अफसर आपके क़दमों पर गिर पड़ा और बेसाख्ता बोल उठा हुज़ूर बिला शुब्हा आपका हथियार बेहतर है ये सिर्फ मख्लूक़ को ज़िन्दगी ही नहीं देता बल्कि मुझ जैसे बेईमान को ईमान की दौलत भी अता फरमा देता है और ये कहकर फौरन कलमा पढ़ कर मुसलमान हो गया
🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴🌴

Comments

Popular posts from this blog

Allah Ne Hum Makhlook Ko Kyon Paida Kiya ? अल्लाह ने हम मखलूक को पैदा क्यों किया ?

🕋 ﷽ 🕋           ​❥═❥ ❥  ​​इल्म ए दींन  ❥ ❥═❥​​            पैगाम  ए  उम्मते  मुहम्मदी  ﷺ   अल्लाह ने हम मख्लूक़ को पैदा क्यूँ किया !?                 ❝ इंसान परेशान क्यूँ औऱ इलाज़ क्या हैं !? ❞ ••──────•◦❈◦•──────••      ••• ➲  इंसान बीमार क्यों होता है?मुसीबतें क्यों आती हैं? आइये जानते है! ••• ➲  हम अक्सर अपने चारो तरफ परेशान, बीमार, और मुसीबत में फंसे हुए लोगो को देखते है आख़िर क्या है इन परेशानियो की वजह? हमेशा याद रखो कोई भी मुसीबत किसी की भी लाइफ में खुदा की तरफ से उस पर ज़ुल्म के तौर पर नही आती, औऱ ना ही खुदा कभी किसी पर ज़ुल्म करता है, वो तो करीम व रहीम हैं दर असल अपनी परेशानियों की वजह इंसान के अच्छे औऱ बुरे आमाल हैं जो जज़ा औऱ सज़ा की सूरत में हमारी लाइफ में आते है क्योंकि हम सब गुनाहगार हैं कब और कैसे हमसे गुनाह हो जाता हैं हमें इसका अहसास भी नही हो पाता जो कि आज हमने इसके बारे में सोचना ही बन्द कर दिया हम पर न जाने क...

वजू और जदीद साइंस -

بسم الله الرحمن الرحيم वुज़ू और जदीद साइंस किस्त नम्बर 31 सर का मसह करते वक़्त بسم الله اللهم اظلنى تحت ظل عرشك يوم لا ظل الا ظل عرشك तरजुमा ::::: ऐ अल्लाह उस दिन जबकि सिवाय तेरे अर्श के और कहीं साया ना होगा मेरे सर पर अपने अर्श का साया फरमाना  ज़ेहनी तरबियत=== सर पर मसह ( हाथ फेरते वक़्त  ) गोया इस इशारे व हरकत के दौरान उस हशर के मंजर को याद दिलाया गया जहां अर्शे इलाही के साए के सिवा कोई साया ना होगा जबकिे  अल्लाह अज़ज़ा वजल के नाफरमान सवा नेज़े आफताब की तमाज़त से सख़्त परेशान रहेंगे। उस वक़्त की होलनाकी को ज़ेहन में जगह दें ताकि हमें भी अर्शे इलाही के साए में रहने की तमन्ना से सरफराज़ी बख़्शी जाए  कान के मसह के वक़्त اللهم اجعلنى من الذين يستمعون القول و يتبعون احسنة तरजुमा ==== ऐ अल्लाह मुझे उन लोगों में से कर दे जो हक़ बात को कान लगाकर सुनते हैं और अच्छी बात पर अमल करते हैं  गर्दन का मसह करते वक़्त بسم الله اللهم اعتق رقبتى من النار  तरजुमा ==== ऐ अल्लाह मेरी गर्दन को आग से बचा ले  ज़ेहनी तरबियत ====  इस मसह...

शबे बारात में कब्रिस्तान जाना सुन्नत है -

शबे बरात में कब्रस्तान जाना सुन्नत है| بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰه ﷺ उम्मुल मोमिनीन सैयदा हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा फ़रमाती हैं कि एक रात महबूबे किबरिया सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मरे पास से अचानक चले गये। जब मुझे मालूम हुआ तो मैं आपकी तलाश में निकली। अचानक मैंने आपको जन्नतुल बकी  में मौजूद पाया।  उस वक़्त आपका सर मुबारक आसमान की तरफ था। जब आपने मुझे देखा तो फ़रमाया आयशा ! रज़ियल्लाहु तआला अन्हा क्या तुझे यह खौफ़ हो गया था कि खुदा और उसकी रसूल तुझ पर जुल्म करेगा। तो मैंने अर्ज की कि मैंने यह ख्याल किया था कि शायद आप किसी अपनी दूसरी बीवी के पास तशरीफ ले गये हैं।  आपने फ़रमाया कि अल्लाह तआला पंद्रहवीं शाबान की रात में  लोगों की तौबा कुबूल करता हैं और इस रात में इस कद्र लोगों के गुनाह माफ फ़रमाता है कि उनकी तादाद बनी कलब के कबीला की बकरियों से ज़्यादा होती है। 📓तीन नूरानी रातें-25 बिरादराने इस्लाम ! शब-ए-बरात आने वाली है। तौबा करने की रात ,बन्दगी करने की रात ,मगफीरत की रात ,अल...