🕋✭ ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّحْمٰنِﺍلرَّﺣِﻴﻢ ✭🕌
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*रमज़ान शरीफ़*
रमज़ानुल मुबारक का रोज़ा 10 शव्वाल 2 हिजरी में फर्ज़ हुआ।
📚 *खज़ाईनुल इरफान,सफह 42*
इस उम्मत में सबसे पहले आशूरह का रोज़ा फर्ज़ हुआ फिर अय्यामे बैद के रोज़े यानि हर महीने की 13-14-15 के रोज़ो से उसकी फर्ज़ियत मंसूख हुई फिर जब रमज़ान का रोज़ा फर्ज़ हुआ तो अय्यामे बैद की भी फर्ज़ियत मंसूख हुई।
📚 *तफ़्सीरे अहमदी,सफह 57*
दीगर अम्बिया-ए किराम भी रोज़े रखा करते थे अगर चे इसमें इख्तिलाफ है कि ये रोज़ा उन पर फर्ज़ था या नहीं जैसा कि हज़रत आदम अलैहिस्सलाम अय्यामे बैद के रोज़े रखते थे हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम आशूरह का रोज़ा रखते थे हज़रत इदरीस अलैहिस्सलाम हमेशा रोज़ा रखते थे हज़रत नूह अलैहिस्सलाम ईदुल फित्र और ईदुल अज़्हा को छोड़कर हमेशा रोज़ा रखते थे हज़रत दाऊद अलैहिस्सलाम एक दिन छोड़कर रोज़ा रखते हज़रत सुलेमान अलैहिस्सलाम हर महीने की शुरू और बीच और आखिर में 3-3 रोज़ा रखते हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम हर महीने में 3 दिन रोज़ा रखते हज़रत ज़ुलक़िफ्ल अलैहिस्सलाम हमेशा दिन में रोजा रखते और तमाम रात जागकर इबादत करते हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम हमेशा रोज़ा रखते।
📚 *तफ़्सीरे अहमदी,सफह 57*
📚 *तफ़्सीरे खाज़िन,जिल्द 4,सफह 203*
📚 *तफ़्सीरे जुमल,जिल्द 3,सफह 142*
📚 *अल्बिदाया,जिल्द 1/2,सफह 118/19*
रमज़ानुल मुबारक के बाद तमाम नफ्ली रोज़ो में सबसे अफज़ल अरफा यानि 9वी ज़िलहज का रोज़ा है।
📚 *फतावा रज़वियह,जिल्द 8,सफह 442*
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*🕋 ⚘मालिको मौला की बारगाह ए आलिया में दुआ है मालिको मौला हमें कहने सुनने पढ़ने लिखने बोलने से ज्यादा अमल करने की तौफीक़ अता फरमाए*
*⚘ امين يارب العالمين ⚘*
*इस्लामिक पोस्ट के अलावा किसी भी दुनियावी मसलेअ पर पोस्ट करना मना है*
⚠नोट ❁☞ *बन्दा जिस दिन नमाज़ नहीं पड़ता वह दिन उसके लिए मनहूस हो जाता है..✍*
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तालिब ए दुआ एडमिन टीम
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Subhanallah
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